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1.0 प्रमुख उपलब्‍धियां

 

मेट्रों रेलवे, कोलकाता 1997 से 1999 में अत्‍यंत अस्‍त-व्‍यस्‍त परिस्‍थितयों से गुजरी है। भारी संख्‍या में अप्रभावकारी संपत्तियों एवं आयातित कल-पुरजों की अनुपलब्‍धता के कारण उनकी विफलता की वजह से विश्‍वसनीयता एवं समनिष्‍ठता इसके न्‍यूनतम स्‍तर पर रही। उस समय से मेट्रो रेलवे इस संकट से उबर गई है तथा अपने गौरव को पुन: प्राप्‍त कर चुकी है और आज कोलकाता के यात्रियों द्वारा इसके निष्‍पादन को काफी सराहा गया है। उनमें से कुछ प्रमुख बातें/उपलब्‍धियां निम्‍नवत हैं।

 

1.1. देशी विकास

 

वर्तमान में भेल एवं एनजीईएफ रेकों के सभी उपकरणों का देशीयकरण कर दिया गया है। इससे करोड़ों रूपयों की बचत हुई है। सामग्री विकसित करने वाले सभी फार्म कोलकाता के आस-पास ही स्‍थित हैं। इससे सामग्री की उपलब्‍धता में सुधार हुआ है।

1.2. नोआपाड़ा स्‍थित डिपो में चल स्‍टॉक अनुरक्षण की स्‍थापना

 

श्रमशक्‍ति में वृद्धि करने एवं आवधिक निरीक्षण अनुसूची का पालन सुनिश्‍चित करने हेतु टॉलीगंज कारशेड को जनवरी, 2004 में नोआपाड़ा कारशेड में मिला दिया गया। विलय कर दिए जाने के बाद टॉलीगंज कारशेड उप शेड के रूप में कार्य कर रही है जहां रात दिन आधार पर केवल ट्रिप जांच एवं रेकों की सुरक्षित चालन की जांच की जाती है।

 

1.3. दमदम विद्युत उपकेंद्र में संबद्ध एचएससीबी एवं संबद्ध 2 अदद मोटर परिचालित आइसोलेटर के साथ एक पूर्णत: नया 5वां फीडर की व्‍यवस्‍था

 

संबद्ध एचएससीबी एवं संबद्ध 2 अदद मोटर परिचालित आइसोलेटर के साथ एक पूर्णत: नया 5वां फीडर की व्‍यवस्‍था जो मेट्रो सेवाओं के प्रारंभ से अलग थे, को दमदम उपकेंद्र में चालू कर दिया गया है। इससे सामान्‍य एचएससीबी में किसी प्रकार की त्रुटि होने की स्‍थिति में तृतीय रेल पावर आपूर्ति की विश्‍वसनीयता में सुधार हुआ है।

1.4. स्‍टेशन प्रदीपन में सुधार

 

दक्षिणी खंड में रवींद्रसरोवर से एस्‍प्‍लानेड स्‍टेशन तक तथा बेलगछियाएवं श्‍यामबाजारस्‍टेशनों में पुराने पर्सपेक्‍स शीट कवर को हटाकर, लाइट फिटिंग के इंटिरियर को उचित रूप से साफ एवं रंगाई कर तथा पानी के रिसाव के कारण क्षतिग्रस्‍त हुए पुरजों की मरम्‍मत एवं प्रतिस्‍थापन कर एवं पुराने रिफ्लेक्‍टर के स्‍थान पर नए रिफ्लेक्‍टरों को लगाकर प्रकाश व्‍यवस्‍था में सुधार किया गया है। उत्‍तरी सेक्‍शन में शेष बचे स्‍टेशनों पर प्रकाश व्‍यवस्‍था में सुधार का काम चल रहा है। प्रकाश के स्‍तर में 75 लक्‍स से लगभग 150-200 लक्‍स की औसत सुधार हुआ है। स्‍टेशनों को चमकदार बनाने के लिए सीलिंग एवं ग्रिलों की सफाई एवं रंगाई भी की गई है। इस संशोधन कार्य से प्रकाश स्‍तर में किसी प्रकार का समझौता किए बगैर ऊर्जा खपत के लिए 75 प्रतिशत सेंट्रल रॉ लाइट को ऑफ स्‍थिति में रखना संभाव हो पाया है।

 

इसके अतिरिक्‍त सात स्‍टेशनों पर प्रकाश स्‍तर में सुधार करने एवं ऊर्जा दक्षता में सुधार करने के लिए पुराने फिटिंग्स के स्‍थान पर ऊर्जा दक्ष टी5 फिटिंग लगा दिए गए हैं।

 

1.5. परिसंपत्तियों का प्रतिस्‍थापन

 

a.भूमिगत स्‍टेशनों में वातानुकूलन संयंत्रों का प्रतिस्‍थापन

 

·दक्षिणी खंड में 5 स्‍टेशनों पर पुराने वातानुकूलन संयंत्रों के स्‍थान पर नए वातानुकूलन संयंत्र लगा दिए गए हैं जिसमें ऊर्जा दक्ष डिजाइन के साथ स्‍क्रू प्रकार के चीलर शामिल हैं। यतिनदास पार्क में वातानुकूलन संयंत्रों का संस्‍थापन प्रक्रियाधीन है। चीलर एवं कूलिंग टावर को बेहतर ऊर्जा दक्षता के लिए संशोधित किया गया है।

·दक्षिणी खंड के संदर्भ में सभी स्‍टेशनों पर (चांदनी चौक को छोड़कर) वातानुकूलन संयंत्रों का प्रतिस्‍थापन कर दिया गया है। इन स्‍टेशनों के लिए नए वातानुकूलन मशीनें (चीलर) पर्यावरण हितैषी R-134ए रेफ्रिजेंट एवं मशीनें आधुनिकतम तकनीकी के साथ ऊर्जा दक्ष हैं।

 

बी.विद्युत आपूर्ति संस्‍थापन

भूमिगत खंड के 33 केवी पुराने डीसी एवं एलटी पैनलों का प्रतिस्‍थापन अवधि सह स्‍थिति आधार पर प्रारंभ कर दिया गया है।मौजूदा पैनलों में एमओसीबी के स्‍थान पर वीसीबी का प्रतिस्‍थापन किया जा रहा है। ऊर्जा दक्षता में वृद्धि के लिए विद्युत आपूर्ति को बढ़ाने की आवश्‍यकता विचारधीन है।

सी.पंपिंग संस्‍थापनों का प्रतिस्‍थापन

दक्षिणी खंड के भूमिगत खंड में पंपिंग संस्‍थापनों को उनकी कोडल अवधि समाप्‍त होने पर बदल दिया गया है।

 

डी.स्‍वचालित सीढि़यों का प्रतिस्‍थापन

 

पुराने स्‍वचालित सीढ़ियों का चरणवार प्रतिस्‍थापन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

 

1.6.संवातन एवं वातानुकूलन में सुधार के लिए डीएमआरसी रिपोर्ट का क्रियान्‍वयन

 

·ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए वातानुकूलन संयंत्र प्रतिस्‍थापन कार्य के दौरान सेमी-क्‍लोज्‍ड सिस्‍टम (प्‍लेटफार्म निकासी वायु पुनर्चक्रण के नीचे) का क्रियान्वयन किया गया है। नलिका व्‍यवस्‍था में आवश्‍यक संशोधन धुंआ/आग के दौरान सुरक्षा आवश्‍यकताओं को सुनिश्‍चित करती है।

·सभी वायु धोवनों के स्‍थान पर 10 माइक्रॉन ड्राइ फिल्‍टर लगा दिए गए हैं जिससे ऊर्जा खपत में बचत हुई है। आसपास के वातावारणिक वायु की तुलना में वायु प्रवेशन/सुरंग की गुणवता में काफी अधिक सुधार हुआ है।

 

1.7.संरक्षा:

 

·पावर सुरक्षा प्रणाली के लिए डिजीटल प्रोटेक्‍शन एवं कंट्रोल सिस्‍टम का संस्‍थापन किया गया है।

·भूमिगत खंडों के लिए धुंआ निकासी सुविध : भुमिगत सेक्‍शन में धुंआ/आग लगने की स्‍थिति में धुंआ निकालने की सुविधा के लिए प्रथम चरण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

 

1.8.ऊर्जा दक्षता अभियान

ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए निम्‍नलिखित कार्रवाई की गई है।

·संवातन पंखों के लिए चरणबद्ध तरीके से वीवीवीएफ ड्राइवों का प्रावधान

·मेट्रो रेल भवन में सौर ऊर्जा तथा उत्‍थित मार्ग पर 50 अदद पैरापेट लाइटिंग का प्रावधान

·एससीएडीए के माध्‍यम से प्रकाश व्‍यवस्‍था का समय एवं समूह स्‍विच

·स्‍टेशनों पर वातानुकूलन संयंत्रों का इष्‍टतम परिचालन

 

1.9.रेकों के पीओएच चक्र समय में कर्मी

 

2008-09 से पहले पीओएच उत्‍पादन प्रति महीने 3 कोच था जिससे समूचे रेक के लिए चक्र अवधि लगभग 120 दिन होती थी। 2008-09 से पीओएच उत्‍पादन में 4 कोच प्रति महीने की वृद्धि हुई है। परिणामस्‍वरूप2010-11में लगभग 34 कार्यदिवसों के औसत समय चक्र के साथ 6 रेकोंका उत्‍पादन किया गया।

 

1.10.स्‍काडा

आईटीआई निर्मित पुराने SCADA प्रणाली के स्‍थान पर आधुनिकतम पीसी आधारित रिमोट कंट्रोल सिस्‍टम (आरसीसी) लगा दिए गए हैं। केंद्रीकृत एकीकृत नियंत्रणकक्ष में नई नकल पैनल संस्‍थापित कर दिया गया है। वर्तमान स्‍काडा में निम्‍नलिखित अतिरिक्‍त विशिष्‍टताओं को शामिल किया गया है।:

·स्‍टेशन संवातन पंखों स्‍टेशन प्रकाश एवं आरसीसी स्‍थित सुरंग बत्‍तियों का नियंत्रण एवं अनुवीक्षण

·स्‍टेशन वातानुकूलन कंप्रेसर एवं सहायक चिलर पंपों को आरसीसी से मॉनिटरिंग करना।

·भूमिगत स्‍टेशनों में प्‍लेटफॉर्म एवं मेजनिन के तापमान आद्रता काआरसीसी से अनुवीक्षण

विभिन्‍न एएसएस एवं टीएसएस के विद्युत धारा वोल्‍टेज पावर एवं ऊर्जा आदि जैसे विभिन्‍न इलेक्‍ट्रिकल पैरामीटरों की आरसीसी से मॉनिटरिंग करना




Source : मेट्रो रेलवे कोलकता / भारतीय रेल का पोर्टल CMS Team Last Reviewed on: 21-09-2015