Indian Railway main logo
खोज :
Increase Font size Normal Font Decrease Font size
   View Content in English
National Emblem of India

हमारे बारे में

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

समाचार एवं भर्ती सूचनाएं

मेट्रो चेतना

निविदाएं

मेट्रो कर्मी

हमसे संपर्क करें



 
Bookmark Mail this page Print this page
QUICK LINKS


                                                

            श्री विश्‍वेश चौबे, मेट्रो रेलवे, कोलकाता के नए महाप्रबंधक

श्री विश्‍वेश चौबे
, प्रधान मुख्‍य इंजीनियर, दक्षिण पूर्व रेलवे ने महाप्रबंधक मेट्रो रेलवे, कोलकाता के रूप में आज दिनांक 09.05.2017 को पदभार ग्रहण कर लिया है। ये 1980 बैच के आइआरएसइ अधिकारी हैं। इन्‍होंने इंस्‍टीटयूट ऑफ टेक्‍नोलॉजीलॉजी, बनारस हिन्‍दु विश्‍वविद्यालय से सिविल में बी.टेक एवं आई.आई.टी. दिल्‍ली से स्‍ट्रक्‍चर में एम. टेक. किया है।

ये भारतीय रेलवे के प्रतिष्‍ठित सिविल इंजीनियरी संस्‍थान (इरीकेन), पुणे, जो सरकारी एवं निजी क्षेत्र से संबंधित विशेषकर रेल परिवहन एवं संबद्ध क्षेत्र को प्रशिक्षण प्रदान करता है, के निदेशक रह चुके हैं। श्री विश्‍वेश चौबे के प्रबंधन में इरिकेन ने सावित्रीबाई फूले पुणे विश्‍वविद्यालय के सहयोग से एम.टेक पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। इन्‍होंने विभिन्‍न तकनीकी स्‍थायी समितियों में जैसे ट्रैक स्‍टैन्‍डर्ड कमिटी, व्रिज स्‍टैन्‍डर्ड कमिटी एवं वर्क स्‍टैन्‍डर्ड कमिटी जो डिजाइन निर्माण मेन्‍टेनेंश एवं रेल रोड एवं संबद्ध क्षेत्रों के नीतियों एवं प्रक्रियाओं का पूर्ण स्‍वर परिसर (गैमट) में भी अध्‍यक्ष के रूप में सेवाएं प्रदान की है।

इन्‍होंने उत्‍तर रेलवे के महत्‍वपूर्ण पदों पर जैसे मुख्‍य ट्रैक इंजीनियर एवं मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर के रूप में भी कार्य किया है। मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर के सेवाकाल के दौरान आपने यातयात सुविधा एवं 33 स्‍टेशनों के निर्माण कार्य के दौरान नन इंटरलॉक्‍ड वर्किंग जैसे विभिन्‍न कार्यों को पूरा किया है। 2010 में कश्‍मीर घाटी की अशांति एवं पंजाब के अनेक किसान आंदोलनों को सफलतापूर्वक संभाला। मंडल रेल प्रबंधक के रूप में सेवा अवधि के दौरान काश्‍मीर घाटी के आंदोलनकारियों द्वारा रेलवे सम्‍पदा को तहस-नहस करने के बाद विपरीत परिस्‍थितियों में रेल सेवा को दक्षतापूर्वक बहाल किया।

रेलवे बोर्ड में कार्यपालक निदेशक/सिविल इंजीनियरी (परियोजना) के अपने कार्यकाल में उन्‍होंने रेल-सड़क रख-रखाव के लिए नीति निर्माण में अपना सहयोग दिया तथा भारतीय रेलवे में उच्‍चतर एक्‍सेल भार के क्रियान्‍वयन की देख-रेख की जिसमें क्रियान्‍वयन के कई पहलू शामिल थे।

पश्‍चिम रेलवे में मुख्‍य इंजीनियर/निर्माण के रूप में कार्य करते हुए उन्‍होंने पश्‍चिम रेलवे में 500 किलोमीटर से अधिक नवनिर्मित रेलवे लाइनों को चालू किया। उनके द्वारा अवसंरचनात्‍मक विकास की कई नयी परियोजनाओं का निष्‍पादन किया गया। निर्माण, परिचालन अंतरण (बीओटी) आधार पर पश्‍चिम रेलवे में पहली परियोजना अर्थात विरामगम-मेहसाना गेज परिवर्तन परियोजना उनके द्वारा परिकल्‍पित एवं पूरी की गई। वे सुरेंद्रनगर-पिपावाव रेलवे लाइन परियोजना से भी निकटता से जुड़े थे जो संयुक्‍त उद्यम विशेष उद्देश्‍य यान (एसपीवी) द्वारा पीपीपी आधार पर निष्‍पादित एक अन्‍य परियोजना थी।

रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल), भारतीय रेलवे की एक कंपनी, के प्रथम एवं संस्‍थापक निदेशक के रूप में उन्‍होंने मुख्‍यत: गैर-बजटीय वित्‍तीय स्रोतों एवं एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), निर्माण परिचालन अंतरण (बीओटी) के निजी भागीदारी मोडल के प्रयोग, रणनीतिक एवं वित्‍तीय निवेशकों द्वारा इक्‍विटी भागीदारी के साथ संयुक्‍त उद्यम एसपीवी एवं बैंकों एवं वित्‍तीय संस्‍थानों से ऋण जैसे बाह्यबहुमुखी एजेंसियों से निधि जमा करने के कई विकल्‍पों के प्रयोग द्वारा विभिन्‍न परियोजनाओं की सफलतापूर्वक एवं शीघ्र क्रियान्‍वयन हेतु विभिन्‍न प्रक्रियाओं एवं प्रत्‍यायोजनोंका विनिर्धारण किया। आधुनिक समय में रेलवे के क्षेत्र में पहली बार उनके द्वारा बड़े मूल्‍य के संविदाओं का सफलतापूर्वक निष्‍पादन किया गया। उनके प्रबंधकीय क्षमता में यहां भी कई रेलवे परियोजनाओं को सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया।

उन्‍होंने आरडीएसओ में संयुक्‍त निदेशक के रूप में कार्य किया जहां उन्‍होंने रेलवे की थियुनी-गेज नीति के तीव्र क्रियान्‍वयन हेतु बड़ी लाइन गाड़ियों के वहन के लिए विद्यमान मीटर गेज पुलों को मजबूत करने हेतु तकनीकी निर्देशन भी प्रदान किए। कमजोर रेलवे निर्माण को मजबूती प्रदान करने के लिए कार्य पद्धति के सुझाव के संबंध मेंकई रिपोर्टें उनके नाम हैं।

उन्‍होंने पश्‍चिम, पश्‍चिम मध्‍य, पूर्व मध्‍य एवंपूर्वोत्‍तर रेलों के कई मंडलों में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

उन्‍होंने यूएसए, इटली, सिंगापुर, मलेशिया एवं जर्मनी की रेलवे प्रणाली का दौरा किया एवं टेपर स्‍कूल ऑफ बिजनेस, कारनेज मेलन यूनिवर्सिटी, पिट्सबर्ग में प्रशिक्षण प्राप्‍त किया है।

वे भारतीय रेलवे में ट्रैक प्रौद्योगिकी के अन्‍य कई प्रमुख विशेषज्ञताओं के साथ हैंडबुक फॉर ट्रैक मेंटेनेन्‍स तथा इंट्रोड्यूसिंग सेकेंड फेज ऑफ मोडर्नैजेशन ऑफ ट्रैक पर रिपोर्ट के सह-लेखक भी हैं। उनकी कई लेखें विभिन्‍न राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
 




Source : मेट्रो रेलवे कोलकता / भारतीय रेल का पोर्टल CMS Team Last Reviewed on: 01-11-2017  


  प्रशासनिक लॉगिन | साईट मैप | हमसे संपर्क करें | आरटीआई | अस्वीकरण | नियम एवं शर्तें | गोपनीयता नीति Valid CSS! Valid XHTML 1.0 Strict

© 2010  सभी अधिकार सुरक्षित

यह भारतीय रेल के पोर्टल, एक के लिए एक एकल खिड़की सूचना और सेवाओं के लिए उपयोग की जा रही विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं द्वारा प्रदान के उद्देश्य से विकसित की है. इस पोर्टल में सामग्री विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं और विभागों क्रिस, रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा बनाए रखा का एक सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है.